पति को मारी गोली फिर पत्नी को ही खिलाए खून से सने चावल… कश्मीरी पंडितों की ये दास्तां सुन कांप उठेगा कलेजा

मुंबई: कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर बेस्ड फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों चर्चा में हैं। ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्ममेकर विवेक रंजन अग्निहोत्री के निर्देशन में बनीं हैं। फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी जैसे स्टार्स हैं। थिएटर्स से फिल्म देखकर बाहर निकलने वाले लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। ऐसे कई वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फिल्म देखकर आए लोगों का कहना है कि बाॅलीवुड में पहली बार किसी डायरेक्टर ने इतनी हिम्मत दिखाते हुए 32 साल पहले कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुई बर्बरता की सच्चाई दिखाने की कोशिश की है।

वहीं फिल्म के रिलीज होने के बाद वहीं आज हम आपको कश्मीरी पंडितों के साथ हुईं उन दास्ताओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुन आपका कलेजा कांप उठेगा।टीचर गिरिजा टिक्कू और बीके गंजू के साथ हुई अमानवीय घटना सुन हर किसी की आंखों में पानी आ जाएगा।

सुनंदा वशिष्ठ के मुताबिक आतंकियों ने बांदीपोरा की टीचर गिरिजा टिक्कू को पहले किडनैप किया। आतंकवादियों ने टीचर गिरिजा टिक्कू गैंगरेप किया और उन्हें दो हिस्सों में काट डाला। टीचर गिरिजा टिक्कू के साथ ऐसा करने वालों में वो लोग शामिल थे जिन्हें गिरिजा टिक्कू ने पढ़ाया था।

सुनंदा वशिष्ठ ने कश्मीरी पंडित बीके गंजू के साथ हुई अमानवीय घटना का भी जिक्र किया। सुनंदा वशिष्ठ के मुताबिक बीके गंजू जैसे लोगों को पड़ोसियों पर विश्वास करने के बदले सिर्फ और सिर्फ धोखा मिला। आतंकवादियों ने बीके गंजू को कंटेनर में ही गोली मारी। कश्मीरी पंडित बीके गंजू को गोली मारने के बाद उनकी पत्नी को खून से सने चावल खिलाए थे।

वैसे कश्मीर घाटी में हिंदुओं की हत्‍या का सिलसिला 1989 से ही शुरू हो चुका था। सबसे पहले पंडित टीका लाल टपलू की हत्‍या की गई। श्रीनगर में सरेआम टपलू को गोलियों से भून दिया गया। टीका लाल टपलू कश्‍मीरी पंडितों के बड़े नेता थे। इसका आरोप जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के आतंकियों पर लगा लेकिन कभी किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं हुआ।पलू को गोलियों से भूनने के डेढ़ महीने बाद रिटायर्ड जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। गंजू ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के नेता मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। गंजू की पत्नी को किडनैप कर लिया गया और वह अब तक किसी को नहीं मिली।

इसके बाद वकील प्रेमनाथ भट को मार दिया गया। 13 फरवरी 1990 को श्रीनगर के टेलीविजन केंद्र के निदेशक लासा कौल की हत्या कर दी गई। ये तो वो लोग हैं जो रसूख वाले थे। साधारण लोगों की हत्या की तो गिनती भी नहीं की जा सकती। जनवरी 1990 को श्रीनगर से छपने वाले एक उर्दू अखबार में हिजबुल मुजाहिदीन का एक बयान छपा। इसमें हिंदुओं को घाटी छोड़ने के लिए कहा गया था।उन्‍हें खुलेआम कश्मीर छोड़ने या फिर इस्लाम कबूल करने की धमकियां दी जा रही थीं। एक तरफ कश्मीर घाटी में दहशत का माहौल था तो दूसरी तरफ फारुख अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में 70 अपराधी जेल से रिहा किए थे।

 

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