स्किन टू स्किन’ जजमेंट वाली जस्टिस फिर विवादों में, कहा- नाबालिग का हाथ पकड़ना या आरोपी का पैंट उतारना यौन उत्पीड़न नहीं

स्किन टू स्किन’ जजमेंट वाली जस्टिस फिर विवादों में, कहा- नाबालिग का हाथ पकड़ना या आरोपी का पैंट उतारना यौन उत्पीड़न नहीं

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला एक बार फिर चर्चा में हैं. 19 जनवरी को ‘स्किन टू स्किन’ जजमेंट के बाद बेंच के आदेश को लेकर आम जनता में काफी रोष नजर आया था. अब कोर्ट के कुछ और फैसले भी सामने आए हैं, जिसमें बेंच ने पॉक्सो एक्ट के दो और आरोपियों को 14 और 15 जनवरी को बरी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई हुई है.

15 जनवरी के फैसले में, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के 50 वर्षीय मजदूर को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि नाबालिग का हाथ पकड़ना और उसके सामने पैंट उतारना यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं आता.

वहीं, 14 जनवरी के फैसले में कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को पलट दिया, जिसमें उन्होंने 23 वर्षीय को नाबालिग से बालात्कार के आरोपी में इस आधार पर बरी कर दिया कि गवाह विश्वास से प्रेरित नहीं था. कोर्ट ने कहा कि नाबालिग के जन्म प्रमाण पत्र का सत्यापन भी नहीं किया गया हैं

19 जनवरी को न्यायाधीश ने नागपुर निवासी को पॉक्सो एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न के आरोप में बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि शारीरिक संपर्क का मतलब ‘स्किन टू स्किन’ कांटेक्ट होता है. आरोपी पर 12 वर्षीय बच्ची का यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज था. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले में रोक लगा दी है.

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