भय्यू महाराज संत का रहस्यमयी अंत :मॉडलिंग छोड़ संत बने, दो शादियां रचाईं, इस भंवर में ऐसे घिरे कि खुद को खत्म कर लिया

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित भय्यू महाराज सुसाइड केस में फैसला जल्द आने वाला है। अदालत में अंतिम बहस जारी है। सबकी निगाहें सुसाइड केस के तीन आरोपियों समेत 5 किरदारों पर टिकी हैं। बेटी कुहू और पत्नी डॉ. आयुषी के साथ आरोपी केयरटेकर पलक, ड्राइवर शरद और सेवादार विनायक के इर्द-गिर्द यह कहानी तीन साल से घूम रही है। इस दौरान अदालत के अंदर जमकर कानूनी बहस तो दिखी ही, बाहर भी सौतेली मां-बेटी के बीच झगड़े कम नहीं हुए। मॉडलिंग से अध्यात्म, वहां से प्यार-तकरार, फिर शादी और अंतत: सुसाइड।

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जानिए, क्या कहते हैं केस से जुड़े वकील
12 जून 2018 को भय्यू महाराज ने गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। 19 जुलाई को शरद, विनायक और पलक पर FIR कर तीनों को गिरफ्तार किया गया।

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सरकारी वकील बोले- तीनों की साजिश थी
सरकारी वकील गजराज सोलंकी के अनुसार पूरी साजिश शरद, विनायक और पलक की थी। इन तीनों ने महाराज को आत्महत्या करने के लिए उकसाया था।

आरोपियों के वकील बोले- कोर्ट से न्याय की उम्मीद
आरोपियों के वकील धर्मेंद्र गुर्जर का कहना है कि महाराज को ब्लैकमेल करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के झूठे आरोप पुलिस के साथ मिलकर लगाए गए। आयुषी को छोड़कर सभी गवाहों ने विनायक, शरद को महाराज का भरोसेमंद सेवादार बताया है। महाराज की आत्महत्या के वक्त दोनों शहर में नहीं थे। कोर्ट से न्याय की उम्मीद है।

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विनायक के वकील बोले- सुसाइड नोट में सौंपी जिम्मेदारी
विनायक के वकील आशीष चौरे ने कहा कि भय्यू महाराज ने सुसाइड नोट में अपने परिवार, संपत्ति और ट्रस्ट की जिम्मेदारी विनायक को सौंपी थी। इसी कारण फंसाने के लिए विनायक को केस में आरोपी बनाया गया, ताकि वह ट्रस्ट और संपत्ति पर अपना हक न जता सके।

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