कांग्रेस को त्यागपत्र देने वाले गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) क्या मोदी-फाई हो चुके हैं, कांग्रेस तो उनपर यही आरोप लगा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जो ट्वीट किया है वो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने लिखा है कि गुलाम नबी आजाद शार्ट फॉर्म में GNA का डीएनए मोडीफाई हो गया है। ये बात ऐसे ही नहीं कही जा रही है दरअसल, गुलाम नबी आजाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल केमेस्ट्री पॉलिटिकल लाइन से एकदम अलग रही है। राज्यसभा में जब गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हो रहा था तो उनके विदाई भाषण में प्रधानमंत्री भावुक हो गए थे। गुलाम नबी आजाद को पद्म पुरस्कार भी मिला है।

गुलाम नबी आजाद अब संसद सदस्य नहीं हैं और नियम के मुताबिक 2 महीने के अंदर दिल्ली का सरकारी बंगला छोड़ना होता है। आजाद को लंबा वक्त हो चुका है लेकिन अबतक उनसे बंगला खाली करने को नहीं कहा गया है, जबकि बंगले खाली कराने में मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड सबको पता है इसलिए कांग्रेस की तरफ से लग रहे आरोपों में राजनीति का फ्लेवर होना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है।

हालांकि आज पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी गुलाम नबी आजाद को लेकर तीखी बयानबाजी कर रही है। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी ने गुलाम नबी आजाद को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जिस नेता ने अपनी पूरी जिंदगी में कांग्रेस पार्टी की राजनीति की उसके बीजेपी के साथ रिश्ते होने का आरोप लग रहा है। बार बार 9 फरवरी 2021 को राज्यसभा में पीएम मोदी द्वारा दिए गए उस बयान का जिक्र किया जा रहा है जो उन्होंने गुलाब नबी आजाद का राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने पर दिया था।

राज्यसभा में आजाद के योगदान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए थे। पीएम इतने भावुक हुए की बोलते-बोलते रुक गए। उनके आंसू आने लगे। उन्होंने अपने आंसू पोछे फिर टेबल पर रखे गिलास से पानी पिया और कहा सॉरी। इसके बाद उन्होंने फिर अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने आजाद को लोकतंत्र में योगदान के लिए सैल्‍यूट भी किया था। विदाई भाषण में आजाद संग बिताए पलों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, ”गुलाम नबी आजाद के बाद इस पद को जो संभालेंगे, उनको गुलाम नबी जी से मैच करने में बहुत दिक्‍कत पड़ेगी। जब आप मुख्यमंत्री थे, मैं भी एक राज्य के सीएम के तौर पर काम करता था। हमारी बहुत निकटता रहती थी, शायद ही कोई घटना मिलेगी जब हम दोनों में बात नहीं हुई हो।”

मोदी ने आजाद के साथ एक घटना का जिक्र किया और उनकी तारीफ की। पीएम ने कहा, ”एक बार गुजरात के कुछ यात्रियों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था। उस हमले में करीब 8 लोग मारे गए। सबसे पहले गुलाम नबी का फोन मेरे पास आया। गुलाम नबी आजाद ने लगातार इस घटना पर निगरानी रखी। आजाद उन यात्रियों को लेकर इतने चिंतित थे कि जैसे वो उनके परिवार के सदस्य हों।”

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