UP Election 2022 : अखिलेश यादव की रैलियों में भीड़ क्या योगी को सत्ता से बाहर कर देगी?

UP Election 2022 : अखिलेश यादव की रैलियों में भीड़  क्या योगी को सत्ता से बाहर कर देगी?

Uttar Pradesh Legislative Assembly election, 2022 : भाजपा भले ही योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) के दोबारा यूपी का मुख्‍यमंत्री बनने को लेकर आश्‍वस्‍त हो, मगर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की चुनावी रैलियों के अनुभव के आधार पर स्‍वामीनाथन अय्यर (Swaminathan Aiyar) कहते हैं कि ओपिनियन पोल्‍स के अनुमान गलत साबित हो सकते हैं।

नई दिल्‍ली : उत्‍तर प्रदेश का चुनावी महासमर अंतिम दौर में पहुंच चुका है। सोमवार (7 मार्च, 2022) को सातवें और अंतिम चरण का मतदान होना है। 2017 में सियासी पिच पर ताबड़तोड़ बैटिंग करने वाली बीजेपी के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव उसकी फॉर्म का सबसे बड़ा टेस्‍ट है। ओपिनियन पोल के अनुमान हैं कि बीजेपी दोबारा सत्‍ता में आ सकती है। हालांकि, स्‍वामीनाथन अय्यर अपने साप्‍ताहिक कॉलम Swaminomics में लिखते हैं कि उत्‍तर प्रदेश के चुनाव परिणाम इन अनुमानों से उलट भी जा सकते हैं। अय्यर ने यूपी चुनाव 2022 के दौरान रैलियों को कवर करने का अनुभव लिखा है। वह पूर्व सीएम अखिलेश यादव की 1 मार्च को बलिया में हुई रैली का खासतौर पर जिक्र करते हैं। अय्यर कहते हैं, ‘कुछ पत्रकारों को मंच के सामने बने सिक्‍योरिटी जोन में जाने की इजाजत थी लेकिन जब अखिलेश आए तो भीड़ इतने जोश में आ गई कि बैरियर तोड़कर मंच की तरफ टूट पड़ी। स्‍मार्टफोन्‍स ऊपर करके अखिलेश का फोटो लेने की होड़ थी। कुछ पत्रकार तो उस भगदड़ में लगभग कुचले ही गए। मैंने दो साथी पत्रकारों को कसकर पकड़ा ताकि तीनों भीड़ के उस तूफान में टिके रह सकें।’

अय्यर ने अपने कॉलम में अखिलेश यादव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की चुनावी रैलियों की तुलना की। वह लिखते हैं, ‘अगले दिन सोनभद्र में पीएम मोदी की रैली थी। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने खूब जोश से नारे लगाए मगर भीड़ में उतना उत्‍साह नहीं दिखा। मैंने ऐसी रैलियां देखी हैं जहां मोदी ने जनता के साथ गजब की केमिस्‍ट्री दिखाई, सवाल पूछे, मनमाफिक जवाब पाए। सोनभद्र में भीड़ दोस्‍ताना तो थी मगर वो करंट नजर नहीं आया।’

रैलियों में भीड़ का मूड क्‍या बता रहा?
Swaminomics में अय्यर लिखते हैं कि मोदी के भाषण का एक प्रमुख हिस्‍सा राम मंदिर व अन्‍य सांप्रदायिक मामलों पर था। अय्यर के अनुसार, ‘पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में वोटर्स के साथ मेरी बातचीत में सांप्रदायिक तनाव कम दिखा। ज्‍यादातर हिंदुओं और मुस्लिमों ने कहा कि धर्म मुद्दा नहीं है। आर्मचेयर एनालिस्‍ट्स के दावे कि बीजेपी का चुनाव प्रचार नफरत के सहारे चल रहा है, बेहद बढ़ा-चढ़ाकर किए गए हैं।’ अय्यर ने लिखा, ‘अगले दिन हमने योगी आदित्‍यनाथ की रैली देखी जो माहौल के लिहाज से अखिलेश की रैली के ठीक उलट थी। भीड़ कम थी, मैदान का केवल एक हिस्‍सा भी भरा था। वह जब उपलब्धियां गिना रहे थे तो काफी सारे लोग बाहर जाने लगे थे। कुछ लोग उन्‍हें (योगी) मोदी का स्‍वाभाविक उत्‍तराधिकारी मानते हैं लेकिन रैली में वैसा दिखा नहीं।’