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अगर आपने अपने लिए कोई लक्ष्य चुना है और आपको लग रहा है कि आपकी परिस्थितियां आपको अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने से रोक रही हैं, उन बुरी परिस्थितियों के कारण आपकी हिम्मत कमजोर पड़ रही है तो इस लड़के की कहानी जान लीजिए. कमजोर आर्थिक स्थिति से जूझने वाला ये बेहद साधारण सा लड़का आज IAS ऑफिसर है. हम बात कर रहे हैं अपनी आर्थिक कमजोरी से लड़ते हुए आगे बढ़ने वाले 2018 की सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS बने माधव गिट्टे की.

5 भाई बहनों के बीच पले बढ़े माधव का जन्म महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में हुआ. पढ़ने में वह बचपन से होशियार थे लेकिन उनकी पढ़ाई में घर की आर्थिक तंगी ने हमेशा अड़चन डालने की कोशिश की. इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी नाता नहीं तोड़ा. उनके घर की आर्थिक स्थिति क्या रही होगी इसका अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि माधव के पिता पिता खेतों में काम कर के अपनी अकेली कमाई से परिवार का गुजारा कर रहे थे. इसके ऊपर एक और मुसीबत तब आ गई जब माधव की मां को कैंसर जैसा भयानक रोग हो गया. उस समय माधव 10वीं में पढ़ रहे थे. इस बीमारी ने माधव से उनकी मां छीन ली और वह हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गईं.

मां के जाने के दुख ने माधव को भीतर से तोड़ दिया लेकिन उन्होंने खुद को संभाला. 11वीं की पढ़ाई के लिए वह हर रोज 11 किलोमीटर साइकिल चला कर जाते थे. 11वीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद आर्थिक तंगी ने एक बार फिर से उनका रास्ता रोकने की कोशिश की. फीस की तंगी के कारण उन्होंने 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और अपने खेतों के साथ साथ दूसरों के खेतों में काम करने लगे. इसी मजदूरी से उन्होंने अपने 12वीं के दाखिले के लिए फीस और हिम्मत जुटाई.

दिक्कतें अभी खत्म कहां हुई थीं. 12वीं पास करने के बाद उनके सामने परिवार की जिम्मेदारी थी, जिससे निभाने के लिए एक फैक्ट्री में काम करना पड़ा. उन्होंने तो सोचा था वह जल्दी से आईटीआई पास कर नौकरी कर लेंगे लेकिन उन्हें किसी भी सरकारी आईटीआई में जगह नहीं मिली. इसके बाद मायूस होकर माधव ने पुणे की एक फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया. यहां उन्हें महीने के 2,400 मिलते थे. उसके बाद वे वापस अपने घर आ गए और खेतों में काम करने लगे. इसी दौरान उन्होंने जैसे तैसे फीस के लिए पैसे जमा किए और पॉलिटेक्निक में दाखिला ले लिया. यहां से वह अच्छे नंबरों के साथ पास हुए.

डिप्लोमा के बाद उन्हें नौकरियां तो मिल रही थीं लेकिन अब उन्होंने सोच लिया था कि वह आगे पढ़ेंगे. इसके लिए उन्होंने पिता से मदद मांगी. आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद माधव के पिता ने उनके लिए फीस का इंतजाम किया. जिसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के लिए दाखिला ले लिया. एक साल तक तो वह पढ़ सके लेकिन अगली फीस भरने की जब बारी आई तो समस्या फिर से खड़ी हो गई. इस बार माधव के पिता ने उनकी फीस भरने के लिए अपनी जमीन गिरवी रख दी और एक लाख रुपयों का इंतजाम कर दिया.

पिता का ये बलिदान उस समय सफल रहा जब माधव को एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गई. यह उनके जीवन का वो मोड़ था जो उन्हें उनके मुख्य लक्ष्य तक ले जाने वाला था. उन्होंने बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर 3 सालों तक काम किया. इसके बाद 2017 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा देने का मन बनाया. लोगों की सेवा करने की सोच के साथ उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और परीक्षा की तैयारी में लग गए.

माधव ने जी तोड़ मेहनत की और उनकी मेहनत रंग भी लाई. 2018 में उन्होंने अपने पहले प्रयास में 567वां रैंक हासिल करते हुए सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ली. इसके बाद अगले ही साल उन्होंने दूसरे प्रायस में 201वां रैंक प्राप्त कर लिया और बन गए IAS ऑफिसर

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