यूक्रेन में फंसे भारतीयों पर गन्दी राजनीति कर रहे विपक्ष पर भड़के राष्ट्रीय विकलांग सेवक संघ प्रमुख, जानें उनके एक खुलासे से क्यों बौखला गया विपक्ष

यूक्रेन में फंसे भारतीयों पर गन्दी राजनीति कर रहे विपक्ष पर भड़के राष्ट्रीय विकलांग सेवक संघ प्रमुख, जानें उनके एक खुलासे से क्यों बौखला गया विपक्ष

नई दिल्ली, इस समय संपूर्ण विश्व में विश्व युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। विश्व के सभी देशों के समक्ष रूस और यूक्रेन के बीच हो रही जंग दिन प्रतिदिन नए आयाम और चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहा हैं भारत भी इससे अछूता नहीं हैं। जहाँ एक ओर भारत सरकार और बीजेपी इन हालातों के बीच देश की छवि को अंतराष्ट्रीय समुदाय में एक गुटनिरपेक्ष देश के रूप में बनाये रखने को प्रतिबद्ध हैं और साथ ही यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष पार्टियां प्रतिदिन कोई ना कोई गलत अफवाह और बयान देकर देश और सरकार की छवि को धूमिल करने को लगातार प्रयासरत हैं।

इस बीच हमारे नई दिल्ली स्थित स्टूडियो में दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रीय विकलांग सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राणा विक्रम सिंह ने विपक्षी नेताओं की इन करतूतों पर उन्हें जमकर लताड़ लगाई है और उनके सम्बन्ध में कई जोरदार खुलासे भी किये। उन्होंने कहा कि जिस योगी आदित्यनाथ और नरेन्द्र मोदी को आप वामपंथी व सेकुलर बुद्धिजिवी लोग दिन रात बात बात पर तंज कसते रहते है। वही मोदी चुपचाप यूक्रेन में फंसे हुए भारतीयों की समस्यांओं को सुलझानें में लगा हुआ था।जिसका प्रतिफल अब दिखना शुरू हो गया है। यूक्रेन से बाहर निकलनें में भारतीयों को भारत का झण्डा साथ होनें पर यूक्रेन व रूस की सेना उन्हें पूर्ण मदद भी कर रहा है।

हम भारत के लोगों को अब सोंचना चाहिए कि प्रश्न सिर्फ सत्ता पक्ष से ही पूछा जाना चाहिए या चुनाव जीते हुए सभी पार्टी के जनप्रतिनिधियों से भी…कि आपनें अपने-अपने स्तर से अफगानिस्तान संकट, रूस-यूक्रेन संकट या कोविड संकट के समय हमारें लिए क्या-क्या कदम उठाएं है…??भले ही वामपंथी पार्टी, कांग्रेस, सपा,बसपा, राजद, तृणमूल कांग्रेस,NCP या अन्य सेकुलर पार्टियों को बहुमत नही मिला हो,परंतु इन पार्टियों के भी कुछ नेता जनता के ही वोट से चुनाव जीतकर लोकसभा व विधानसभा का सदस्य निर्वाचित हुए है,इन परिस्थितियों में इनलोगों से भी प्रश्न पूछना बनता है। सेकुलर पार्टियां सभी समस्यांओं के लिए सिर्फ सत्तापक्ष को जिम्मेदारी ठहराकर नही भाग सकता है।

भारतीय जनता को ये भी सोंचना चाहिए कि इन सेकुलर पार्टियों के सदस्यों को जमीनी स्तर पर कुछ जिम्मेवारियों को उठानें के लिए निर्वाचित किया गया है या सिर्फ आलोचना करनें के लिए ।रूस एक साम्यवादी देश है। रूस व चीन में जब बारिश होता है तो भारत के सड़को पर छाता लगाकर बाहर निकलनें वालें भारत के वामपंथी नेता को यूक्रेन में फंसे हुए भारतीयों के लिए कुछ करना चाहिए था ना कि सिर्फ रूस और चीन का बासुरी लेकर बजानें में मग्न होना चाहिए…

लोकतंत्र में तर्कआधारित आलोचना व समालोचना होते रहना चाहिए यही हमारी लोकतंत्र की विशेषता भी है लेकिन तर्कहीन आधारित नही। मानवता के नातें मैं युद्ध का पक्षधर नही हुँ। इसका मैं और हमारी संगठन विरोध करता हैं,किंतु हम भारतीयों को ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि यूक्रेन भी भारत का कभी भी शुभचिंतक देश नही रहा है।