10 साल बाद राम नवमी पर बन रहा विशेष संयोग ,भगवान श्रीराम की कृपा पाने के लिए कर लें ये चमत्कारी उपाय

10 साल बाद राम नवमी पर बन रहा विशेष संयोग ,भगवान श्रीराम की कृपा पाने के लिए कर लें ये चमत्कारी उपाय

हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार राम नवमी 10 अप्रैल,रविवार को है। राम नवमी पर रवि पुष्य योग,सर्वार्थसिद्धि योग एवं रवि योग का त्रिवेणी संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार नवमी तिथि पर भगवान राम का जन्म हुआ था,इसलिए इस शुभ तिथि को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम अयोध्या के राजा दशरथ और महारानी कौशल्या के पुत्र थे। भगवान श्रीराम को विष्णु जी का 7वां अवतार माना जाता है। आइए जानते हैं कि रामनवमी पर कौन से खास उपाय है जिन्हें करने से आपको जीवन में सुख-समृद्धि और शांति मिलती है

भगवान शिव अनादि काल से जिस नाम का स्मरण करते है और जिस नाम की महिमा का बखान भगवती पार्वती से किया हैं,जिनके सेवार्थ उन्होंने श्री हनुमत रूप में अवतार लिया। ऐसे प्रभु श्री राम का नाम बोलना भवसागर से पार तो लगाता है ही साथ ही मनुष्य को समस्त प्रकार के दैहिक,दैविक एवं भौतिक तापों से मुक्ति प्रदान करता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार राम का नाम अमोघ है। इसमें ऐसी शक्ति है जो इस संसार के तो क्या,परलोकों के संकट काटने में भी सक्षम है। माना गया है कि अंतिम समय में राम का नाम लेने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होता है। भगवान श्री रामचंद्र जी का नाम इस कलयुग में कल्पवृक्ष अर्थात मनचाहा फल प्रदान करने एवं कल्याण करने वाला है

पुरुषोत्तम श्री रामजी के परम भक्त हनुमान जी का गुणगान तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में मिलता है। इसलिए रामनवमी के दिन मन में कोई मनोकामना रखकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो भगवान राम और भक्त हनुमान दोनों की कृपा से आपकी मनोकामना पूर्ण होती है। इसके अलावा इस दिन रामायण पाठ,रामस्तुति आदि करना भी विशेष फलदाई है।

दुर्भाग्य को दूर करने के लिए नित्य प्रति राम का नाम लिखना चाहिए,जिसके पुण्य प्रताप से सौभाग्य का सृजन होने लगता है। शास्त्र कहते हैं कि राम नाम लिखने का चमत्कारिक लाभ भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था,ताकि वह अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त कर सकें। भक्तजन रामनवमी से प्रारंभ कर नित्यप्रति लाल स्याही से राम नाम लिखकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। राम नाम लिखने में समय,स्थान की कोई पाबंदी नहीं होती है। राम को जपने वाले स्वयं राम का रूप हो जाते हैं यह बात स्वयं श्री राम जी ने हनुमान से कही है।