चैत्र नवरात्रि पर हो रहा ग्रहों का बड़ा परिवर्तन, इन राशिवालों को होगा फायदा,ऐसे बनाये अपने हिन्दू नववर्ष को फलदाई…

चैत्र नवरात्रि पर हो रहा ग्रहों का बड़ा परिवर्तन, इन राशिवालों को होगा फायदा,ऐसे बनाये अपने हिन्दू नववर्ष को फलदाई…

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू पंचांग का पहला दिन माना जाता है। जिसमें नव वर्ष का आरंभ होता है। कई स्थानों पर इसे उगादि और गुड़ी पड़वा कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 2 अप्रैल, शनिवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष और सनातन धर्म परंपरा में नव संवत्सर का विशेष महत्व है, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से ही आरंभ होता है। इसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत होगी। इन नौ दिनों में मां भवानी के 9 स्वरूपों की पूजा की जाएगी।

इस बार 2 अप्रैल 2022, शनिवार से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। 9 दिनों तक भक्त विधि-विधान से माता की पूजा करेंगे। इस बार मां दुर्गा अश्व पर सवार होकर आ रही हैं। वह भैंसे पर प्रस्थान करेंगी।

चैत्र नवरात्रि पर 2 ग्रहों का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अननुसार 9 दिनों में शनिदेव और मंगल, मकर राशि में गोचर करेंगे। यह दोनों ग्रह एक-दूसरे के शत्रु हैं। एक ही राशि में इनका आना मुश्किले खड़ी करेगा। यह राशि परिवर्तन कर्क, कन्या और धनु राशि के लोगों के लिए शुभ नहीं रहेगा। वहीं मेष, मिथुन, मकर और कुंभ राशिवालों के लिए लाभदायक रहेगा। उन्हें अच्छे समाचार प्राप्त होंगे। आर्थिक स्थिती मजबूत होगी। मां की कृपा से तरक्की होगी।

नव वर्ष को किस तरह मनाया जाता है और क्या खास कार्य करते हैं इस दिन आओ जानते हैं।सूर्योदय से पूर्व उठकर घर की साफ सफाई करने के बाद घर को तोरण, मांडना या रंगोली आदि से सजाया जाता है। इस दिन नव संवत्सर का पूजन, नवरात्र घटस्थापना, ध्वजारोपण आदि विधि-विधान किए जाते हैं। प्रत्येक राज्य में इस पर्व को वहां की स्थानीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार मनाते हैं।

लोग प्रातः जल्दी उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्नान करते हैं। स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद मराठी समाज गुड़ी को बनाकर उसकी पूजा करके घर के द्वारा पर ऊंचे स्थान पर उसे स्थापित करते हैं, जबकि अन्य समाज के लोग धर्म ध्वजा को मकान के उपर लहराते हैं।गुड़ी पड़वा दो शब्दों से मिलकर बना हैं। जिसमें गुड़ी का अर्थ होता हैं विजय पताका और पड़वा का मतलब होता है प्रतिपदा। इस दिन सभी हिन्दू अपने घरों पर भगवा ध्वज लहराकर उसकी पूजा करते हैं। इस कार्य को विधि पूर्वक किया जाता है जिसमें किसी भी प्रकार की गलती नहीं करना चाहिए

इस दिन श्रीखंड का सेवन करके ही दिन की शुरुआत करते हैं। इस दिन पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं जैसे पूरन पोली, पुरी और श्रीखंड, मीठे चावल जिन्हें लोकप्रिय रूप से सक्कर भात कहा जाता है| हर प्रांत के अपने अलग व्यंजन होते हैं।