जानें लखनऊ में जन्मे विरजू महाराज को क्यों कहा जाता था ‘दुखहारण’

लखनऊ,4 फरवरी 1938 को जन्में पंडित बिरजू महाराज लखनऊ घराने से ताल्लुक रखते थे. उनका पूरा नाम पंडित बृजमोहन मिश्रा था, लेकिन लोग उन्हें पंडित बिरजू महाराज के नाम से ही जानते थे. कहा जाता है कि पहले उनका नाम ‘दुखहरण’ रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर ‘बृजमोहन नाथ मिश्रा’ रख दिया गया था.

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पंडित बिरजू महाराज के दुखरहण नाम के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है. कहा जाता है कि 4 फरवरी 1938 को लखनऊ के एक अस्पताल में ग्यारह लड़कियां पैदा हुई थीं. लेकिन इसी बीच उसी अस्पताल में इकलौते लड़के ने जन्म लिया था. वो इकलौते लड़के कोई और नहीं बल्कि पंडित बिरजू महाराज थे.

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ऐसे में उनके जन्म पर सबने कहा कि ‘दुखहरण’ आ गया. आज के दिन पहला लड़का अस्पताल में जन्मा है. लेकिन कुछ घंटों बाद ही कहा जाने लगा कि चारों तरफ गोपियां बीच में कन्हैया और फिर उनका नाम बृजमोहन रख दिया गया. इसके बाद लाड प्यार में लोग उन्हें बिरजू कहने लगे और फिर आदर सम्मान से सुगंधित हुए तो वो बिरजू महाराज के नाम से दुनियाभर में पहचाने जाने लगे.

पंडित बिरजू महाराज अब हमारे बीच नहीं रहे. 83 साल की उम्र में हार्ट अटैक के बाद रविवार देर रात उन्होंने दिल्ली में आखिरी सांस ली. लेकिन पंडित बिरजू महाराज की कला, उनका डांस और उनकी रुहानी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में अमर रहेगी.

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