Afghanistan Crisis: रोटी के लिए बेटियों और किडनी को बेच रहे लोग! लोगों की रुलाने वाली कहानी

Afghanistan Crisis: रोटी के लिए बेटियों और किडनी को बेच रहे लोग! लोगों की रुलाने वाली कहानी

अफगानिस्तान में लोगों के पास इतने पैसे नहीं है कि वो अपने लिए रोटी खरीद सकें. भुखमरी से बचने के लिए लोग अपने बच्चों को बेच रहे हैं. किडनी बेचकर भी लोग पैसे हासिल कर रहे हैं ताकि उनके परिवार को रोटी नसीब हो सके.

  • अफगानिस्तान की आधी से अधिक आबादी भुखमरी के कगार पर
  • किडनी बेच रोटी खरीद रहे लोग
  • कुछ पैसों के लिए बच्चों का सौदा करने को मजबूर

अफगानिस्तान का खाद्य संकट इतना गहरा गया है कि देश की आधे से अधिक जनसंख्या भुखमरी के कगार पर है. लोग खुद को जिंदा रखने के लिए अपनी किडनी और बच्चों तक को बेच रहे हैं. तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लोगों की स्थिति और खराब हुई है. लोग एक वक्त की रोटी जुटाने के लिए अपने शरीर के अंगों का सौदा कर रहे हैं.

अफगानिस्तान में तालिबान ने 15 अगस्त को कब्जा किया जिसके बाद से ही अफगानिस्तान को मिलने वाली अंतर्राष्ट्रीय मानवीय मदद रोक दी गई है. कड़ाके की सर्दी में भूख से जूझ रहे लाखों लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है.

हेरात शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर शहर-ए-सेब्ज क्षेत्र में हजारों अफगान, जिनमें ज्यादातर पश्तून हैं, किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं. तालिबान और पिछली सरकार के बीच संघर्ष और पिछले 4 सालों के सूखे के कारण इन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

इस इलाके में मिट्टी से बने घर हैं जिनमें बिजली, पानी नहीं है. सर्दी से बचने के लिए भी इन घरों में कोई उपाय नहीं है. इन दिनों जब सर्दी के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, ज्यादातर घरों में चूल्हा तक नहीं है. जिनके पास चूल्हे हैं, वे लकड़ी और कोयले की जगह घरों को गर्म करने के लिए प्लास्टिक जलाते हैं. इससे जहरीले धुएं के फैलने और लोगों के जान जाने का डर लगातार बना रहता है.

38 वर्षीय अब्दुलकादिर ने तुर्की के न्यूज चैनल टीआरटी वर्ल्ड से बताया कि दिन भर में उन्होंने केवल चाय पी है और सूखी रोटी खाई है. उसने कहा कि उसके पास इलाज के लिए भी पैसे नहीं हैं.

अब्दुलकादिर कहते हैं, ‘मैं 150,000 अफगानी (करीब 1 लाख 9 हजार रुपये) में अपनी एक किडनी बेचने के लिए अस्पताल गया था. डॉक्टरों ने मुझे बताया कि अगर मेरी सर्जरी हुई और मेरी किडनी निकाल दी गई, तो मैं मर जाऊंगा. लेकिन फिर भी मैं अपनी किडनी बेचना चाहता हूं. हमारी आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि मैं अपने एक बच्चे को 150,000 अफगानी में बेचने को तैयार हूं. इससे मैं अपने परिवार के दूसरे लोगों को बचा सकता हूं.’

इस इलाके में लोगों के पास किसी तरह का रोजगार नहीं है. किशोर और युवा शहरों में भीख मांगते हैं और कचरे से प्लास्टिक और कागज इकट्ठा करते हैं. महिलाएं भी व्यापारियों द्वारा लाए गए ऊन से सूत कातती हैं. लोग प्रति दिन अधिकतम 50-100 अफगानी (लगभग 36-72 रुपये) कमा पाते हैं.

38 वर्षीय गुलबुद्दीन ने बताया कि वो फिलहाल कोई भी शारीरिक काम नहीं कर पाते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी एक किडनी बेच दी है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी 12 साल की बेटी रुजिये को तीन साल पहले 3,500 डॉलर (करीब 2 लाख 62 हजार 2 सौ रुपये) में बेच दिया. दो साल पहले अपनी पत्नी के इलाज के लिए उन्होंने अपनी एक किडनी 2,000 डॉलर ( करीब1 लाख 49 हजार 800 रुपये) में बेची थी.

लेकिन इससे भी उनकी पत्नी की बीमारी ठीक नहीं हुई और आर्थिक मुश्किलें भी जस की तस जारी रहीं.

उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने अपनी दूसरी बेटी, 5 वर्षीय रासी को पिछले साल 1,500 डॉलर ( करीब 1 लाख 12 हजार 400) में बेच दिया.

गुलबुद्दीन आगे कहते हैं, ‘अगर कोई मुझसे मेरी आंख खरीदना चाहता है तो मैं इसे भी बेच सकता हूं ताकि मेरी पत्नी जीवित रहे.’

30 साल की बिबिजाना अपने 70 वर्षीय पिता के साथ रहती हैं. उनके चार बच्चे हैं. उन्होंने बताया, ‘मैंने अपनी किडनी बेच दी. फिर मुझे अपनी एक बेटी को बेचना पड़ा. मैंने उन पैसे से खाने-पीने का सामान खरीदा. काश मैं इस दुनिया में पैदा नहीं होती. काश मैंने इन दिनों को कभी नहीं देखा होता. मेरी जिंदगी नरक है लेकिन मुझे जीना होगा.