साउथ फिल्मों को क्यों मिलती है इतनी लोकप्रियता! कंगना रनोट ने गिनायीं 3 वजह, बॉलीवुड से बचने की दी सलाह

लखनऊ,भारतीय सिनेमा में इस वक्त दक्षिण भारतीय फिल्मों का खूब शोर है। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज हो रहीं फिल्में पिछले कुछ वक्त से जिस तरह से पूरे देश में लोकप्रियता हासिल कर रही हैं, वो अभूतपूर्व है। हाल ही में तेलुगु फिल्म पुष्पा- द राइज की हिंदी बेल्ट में सफलता ने ट्रेड पंडितों को भी हैरान कर दिया। अब कंगना रनोट ने दक्षिण भारतीय फिल्मों की बेतहाशा सफलता पर अपनी राय दी है और तीन वजहें बतायी हैं, जिसके चलते साउथ सिनेमा की फिल्मों को अखिल भारतीय स्तर पर इतना सराहा जा रहा है। साथ ही कंगना ने इन फिल्ममेकर्स को बॉलीवुड से बचने की चेतावनी भी दी।

कंगना ने अपनी इंस्टा स्टोरी में इन कारणों का जिक्र किया है, जिसके चलते साउथ कंटेंट और सुपर स्टार्स का इतना क्रेज है। कंगना ने इसकी पहली वजह बतायी है कि साउथ फिल्मों का कंटेंट की जड़ें भारतीय संस्कृति में गहरे तक पैबस्त हैं। दूसरी वजह है कि वो अपने परिवारों से बेहद प्यार करते हैं और उनके रिश्तों में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव नहीं है, वो भारतीय मान्यताओं के अनुरूप हैं। उनके जज्बे और काम के प्रति समर्पण का कोई मुकाबला नहीं है।

इसके साथ कंगना ने लिखा- उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बॉलीवुड उन्हें भ्रष्ट ना कर सके। बता दें, कंगना की पिछली फिल्म थलाइवी तमिल और हिंदी में रिलीज की गयी थी। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता की बायोपिक की पटकथा केवी विजयेंद्र प्रसाद ने लिखी थी और निर्देशन एएल विजय ने किया था

इस साल साउथ सिनेमा की कई बड़ी फिल्में हिंदी में भी साथ में रिलीज होंगी। इनमें राम चरन-एनटीआर जूनियर की आरआरआर, प्रभास की राधे श्याम, यश की केजीएफ चैप्टर 2, विजय देवरकोंडा की लाइगर और अजीत कुमार की वलिमै शामिल हैं। आरआरआर और राधे श्याम मूल रूप से तेलुगु फिल्में हैं, जबकि केजीएफ चैप्टर 2 कन्नड़ फिल्म है। वहीं, लाइगर हिंदी और तेलुगु में बनायी जा रही है। वलिमै तमिल फिल्म है।

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