सपा में सेंधमारी,बीजेपी करेगी स्वामी की भरपाई,नितिन अग्रवाल समेत सपा के दो विधायकों ने दिया पार्टी से इस्तीफा

लखनऊ,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोग से उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष चुने गए नितिन अग्रवाल समेत समाजवादी पार्टी (सपा) के दो विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। हरदोई सदर सीट से सपा विधायक नितिन अग्रवाल और शाहजहांपुर की जलालाबाद सीट से सपा के ही विधायक शरद वीर सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया है। नितिन ने विधानसभा के उपाध्यक्ष पद से भी बुधवार को इस्तीफा दे दिया। इस सिलसिले में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।

उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे इस्तीफे में कहा है कि वह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं। नितिन 2017 के विधानसभा चुनाव में हरदोई सदर सीट से सपा के विधायक चुने गए थे। उनके पिता पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल 2018 में भाजपा में शामिल हो गए थे। उसके बाद से ही नितिन भी बागी हो गए थे। नितिन को पिछले साल अक्टूबर में प्रदेश की भाजपा सरकार की मदद से विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया था। उस वक्त उन्होंने सपा से त्यागपत्र नहीं दिया था।

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भाजपा की जन विश्वास रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा कर चुके नितिन अग्रवाल के प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर हरदोई सदर सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है। इस बीच, शरद वीर सिंह ने इस बार अपना टिकट कटने से नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल अपने त्यागपत्र में सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की अगुवाई वाली सपा पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की नीतियों से भटक गई है।

सपा विधायक शरद वीर सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया कि उनका टिकट काटकर नीरज मौर्य को दे दिया गया है, इसलिए उन्होंने सपा से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा में जाने की चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने अभी भाजपा की सदस्यता नहीं ली है लेकिन टिकट के लिए आवेदन जरूर किया है। अगर उन्हें पार्टी टिकट देती है तो वह चुनाव लड़ेंगे, अन्यथा जिसे भी भाजपा का टिकट मिलेगा, उसे चुनाव में मदद करेंगे। उन्होंने बताया “हमारा लक्ष्य समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नीरज मौर्य को किसी भी कीमत पर हराना है। हमारे समर्थकों का भी यही सुझाव है।”

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सिंह ने त्यागपत्र में कहा “मैंने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की नीतियों से प्रभावित होकर 1995 में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी और 1996 से लगातार जलालाबाद क्षेत्र में सेवा कर रहा हूं, परंतु अब आपके (अखिलेश यादव) नेतृत्व में समाजवादी पार्टी नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की नीतियों से भटक गई है।”

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