योगी के गुरु गोरखनाथ ने किया था खिचड़ी का अविष्कार, तब से मकर संक्रांति को खायी जाती हैं खिचड़ी

लखनऊ,मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो किसी न किसी रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। पोंगल, बिहू, उत्तरायण जैसे इसके अनेक रूप हैं। इस दिन खिचड़ी बनाने की भी परंपरा है। कहते हैं यह शुरुआत गुरु गोरखनाथ ने की थी। जनश्रुति के अनुसार खिलजी के आक्रमण के समय संघर्ष कर रहे नाथ योगियों की भोजन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गोरखनाथ ने खिचड़ी का आविष्कार किया। खिचड़ी खाकर नाथ योगियों ने कड़ा संघर्ष किया और सैनिकों को अपने इलाके से भगाने में सफल रहे। यही वजह है कि मकर संक्रांति को विजय दर्शन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। सूर्य का यह परिवर्तन केवल भौतिक बदलाव भर नहीं है, बल्कि इसमें आध्यात्मिक जागरण का सूत्र भी छुपा हुआ है। इसे बाहर निकालने के लिए आपको उन रूपकों को समझना होगा जिनके जरिए इसे दर्शाया गया है। यदि यह सूत्र आपने पकड़ लिया, तो मकर संक्रांति का त्योहार आपके भीतर चैतन्य की जागृति का पर्व बन सकता है।

मुंडकोपनिषद में आता है, ‘अंततः सत्य की ही जय होती है न कि असत्य की। सत्य से देवयान मार्ग परिपूर्ण है। इसके द्वारा ही निष्काम ऋषिगण उस परमपद को प्राप्त करते हैं, जहां सत् स्वरूप के श्रेष्ठ भंडार-रूप परमात्मा का निवास है।’ हजारों वर्ष पुरानी वैदिक अवधारणा है कि जीवात्मा इस लोक से परलोक दो ही मार्गों से जाता है- पितृयान और देवयान। वस्तुतः पितृयान बार-बार संसार में आवागमन का मार्ग है, वहीं देवयान मुक्ति का पथ है। जो ज्ञानी देवयान से गमन करते हैं वे मोक्ष प्राप्त कर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।

तैत्तिरीय उपनिषद शिक्षा देता है कि सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो और सत्य में कभी प्रमाद न करो। जो चैतन्य और आत्मानंद की उपलब्धि चाहता है, सत्य की उपासना उसके लिए अनिवार्य है। मन, वचन और कर्म से सत्य का आचरण अंतस में साहस व निर्भयता पैदा करता है, अंदर छुपी चैतन्य की शक्ति को जागृत कर देता है और देवयान का वरण करने की योग्यता देता है। रूपक के भीतर गहराई से देखेंगे तो पाएंगे कि मकर संक्रांति का त्योहार उत्तरायण का आरंभ याद दिलाता है, देवयान का द्वार बताता है, मुक्ति का मार्ग दिखाता है- यह पर्व सत्य की साधना का महत्व समझाता है। आइए, जीवन में सत्य से जुड़कर मकर संक्रांति मनाएं।

Advertisements