बागी धरती बलिया में ताल ठोक रहे राजनीतिक धुरंधर, बढ़ रही सियासी तपिश, जानें पूरी गहमाग़हमी

बागी धरती बलिया में ताल ठोक रहे राजनीतिक धुरंधर, बढ़ रही सियासी तपिश, जानें पूरी गहमाग़हमी

वाराणसी,पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के गृह जनपद बलिया में सियासी तपिश बढ़ गई है। टिकट की तस्वीर अभी धुंधली है, लेकिन सभी प्रमुख दल मतबूत दांव लगाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक रूप से समृद्ध जनपद बगावती तेवर के लिए जाना जाता है। 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडेय, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का भी यह गृह जनपद है। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां की सात सीटों में पांच पर भाजपा ने जीत हासिल की। सपा और बसपा के खाते में एक-एक सीट गई। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। इस बार हर सीट पर दिलचस्प मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं। बलिया से अजीत यादव की रिपोर्ट…।

जिले के फेफना विधायक उपेंद्र तिवारी और बलिया नगर के आनंद स्वरूप शुक्ल प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।बांसडीह विधानसभा क्षेत्र के विधायक पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी सदन में नेता प्रतिपक्ष हैं।सपा सरकार में मंत्री रहे नारद राय, अंबिका चौधरी भी इसी जिले से हैं।कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री बच्चा पाठक 1969 के बाद सात बार विधायक रहे। सपा के पूर्व मंत्री और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी भी यहीं से चुनाव लड़ते हैं। 2017 में कांटे की लड़ाई रही। मात्र 1,687 मतों से उनकी जीत हुई थी। चौधरी को 50,855 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहीं निर्दलीय केतकी सिंह को 49,276 और तीसरे स्थान पर रहे सुभासपा के अरविंद राजभर को 40,234 वोट मिले थे।

सिकंदरपुर,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवमंगल सिंह 1977 व 1985 में प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। 1996 में समता के राजधारी सिंह मंत्री बने। 2012 में मो. जियाउद्दीन रिजवी को सपा सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला। 2017 में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। भाजपा के संजय यादव को 69,536 वोट और सपा के जियाउद्दीन रिजवी को 45,988 और बसपा को राजनारायण को 34,639 वोट मिले थे।

रसड़ा,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह गृह राच्य मंत्री रहे। घुरा राम बसपा शासन में स्वास्थ्य राच्यमंत्री रहे। 2012 और 2017 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार उमाशंकर सिंह का ही दबदबा रहा। पिछले चुनाव में उमाशंकर को 92,272 और भाजपा से लड़े रामइकबाल को 58,385 वोट मिले थे

बेल्थरारोड,1962 में रसड़ा विधानसभा से अलग होकर सीयर विधानसभा क्षेत्र बना। 2012 के परिसीमन में इसका नाम बेल्थरारोड हुआ। 1985 के बाद चार बार शारदानंद अंचल विधायक बने। सपा सरकार में तीन बार मंत्री रहे। 2017 में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। भाजपा के धनंजय कन्नौजिया को 75,504 और सपा के गोरख पासवान को 59,185 मत मिले थे।

बैरिया,2002 में चुने गए भाजपा विधायक भरत सिंह मंत्री भी रहे। 2012 से पहले यह विधानसभा क्षेत्र द्वाबा के नाम से था। नए परिसीमन के बाद नाम बैरिया हो गया। 2012 में यहां सपा की जीत हुई। सपा के जयप्रकाश अंचल विधायक बने थे। 2017 में भाजपा ने जीत हासिल की। भाजपा के सुरेंद्र सिंह को 64,868 वोट, सपा के जयप्रकाश अंचल को 47,791 और बसपा के जवाहर को 27,974 वोट मिले थे।

 

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