जानें बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को चुनाव ना लड़ाने का फैसला क्यों लिया

जानें बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को चुनाव ना लड़ाने का फैसला क्यों लिया

लखनऊ,यूपी चुनाव 2022 (UP Election 2022) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खेमे से बड़ी खबर निकल कर सामने आ रही है। प्रदेश के दूसरे उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह (Swatantra Dev Singh) को भी चुनावी मैदान में नहीं उतारने का फैसला लिया गया है। भाजपा सूत्रों के हवाले से पहले खबर आई थी कि इन दोनों को भी चुनावी मैदान में उतारा जाएगा। अब दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय चुनाव समिति ने इन दोनों नेताओं को चुनावी मैदान में नहीं उतारने का निर्णय लिया है।

डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के लखनऊ ईस्ट या लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारे जाने की चर्चा चल रही थी। वहीं, स्वतंत्र देव सिंह को भी चुनावी मैदान में उतरना था। भाजपा की ओर से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को गोरखपुर सदर विधानसभा सीट (Gorakhpur Sadar Vidhan Sabha Seat) और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सिराथु विधानसभा सीट (Sirathu Assembly Constituency) से चुनावी मैदान में उतारने की घोषणा हो चुकी है। ऐसे में प्रदेश स्तर के इन दोनों नेताओं पर पार्टी ने अतिरिक्त भार देने का निर्णय लिया है।

डॉ. दिनेश शर्मा और स्वतंत्र देव सिंह को पार्टी ने चुनावी प्रचार अभियान में बड़े पैमाने पर उतारने का निर्णय लिया है। भाजपा ने प्रदेश में 300 प्लस का टार्गेट सेट किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इन दोनों नेताओं को चुनावी मैदान में न उतार कर जमीन पर काम करने को कहा गया है। सूत्रों की मानें तो ये दोनों नेता चुनाव न लड़कर पार्टी के लक्ष्य को साधने के लिए टारगेटेड ग्रुप तक पहुंचेंगे। पार्टी का पहला लक्ष्य अब 300 सीट के लक्ष्य को पार करना है। इसके लिए पूरा जोर लगाने का निर्णय लिया गया है।

पार्टी ने पहले सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया। लेकिन, अब उस सीट पर आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ऐसे में सीएम योगी को भी इस सीट पर अब प्रचार के लिए उतरना पड़ सकता है। अन्य बड़े चेहरों को भी चुनावी मैदान में उतारने से प्रचार अभियान पर असर पड़ने का खतरा माना गया। इसके बाद तय किया गया है कि सीनियर नेताओं को चुनावी मैदान में अब उतारने की जगह चुनावी प्रचार अभियान में उतारा जाए।

भाजपा की टेंशन ओपिनियन पोल रिजल्ट ने बढ़ाई है। तमाम चैनलों पर प्रसारित हो रहे ओपिनियन पोल भाजपा की सरकार तो बनता दिखा रहे हैं, लेकिन भाजपा की सीटों में कमी भी होती दिख रही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की 312 सीटों पर कब्जा जमाया था। ऐसे में इस बार भी लक्ष्य 300 के पार जाने का है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी पिछले दिनों टाइम्स नाउ नवभारत के साथ बात करते हुए कहा था कि 10 मार्च को जब चुनाव परिणाम आएगा तो पार्टी 300 सीटों के आंकड़े को पार करती नजर आएगी। ऐसे में अब उस लक्ष्य को हासिल करना पार्टी के सीनियर नेताओं की पहली प्राथमिकता बन गई है।