जानें क्यों किरायेदारी एग्रीमेंट सिर्फ 11 महीनों के लिए होता हैं और क्या किरायेदार कभी मकान मालिक बन सकता हैं

नई दिल्ली,आधुनिक समय में किराएदार और मकान मालिक व्यवस्था अधिक देखने को मिल रही है क्योंकि शहरो का विस्तार हो रहा है और शहरों में दूसरे शहर के लोग आकर रह रहे हैं जिससे वे किसी मकान में कुछ समय के लिए किराएदार के नाते से रहते हैं। किसी संपत्ति के मालिक के लिए भी यह कच्छी आय का साधन हो गया है। संपत्ति के मालिक अपनी संपत्तियों को किराए पर देकर एक बेहतरीन आय अर्जित करता है l

किराया अनुबंध एक कानूनी विषय है तो इस पर सभी कानूनी जानकारियां उन व्यक्तियों को होना चाहिए जो किसी संपत्ति को किराए पर देते हैं और जो किसी संपत्ति को किराए पर लेते हैं। समाज में एक भ्रांति हमेशा से बनी हुई है कि किराएदार मकान मालिक हो जाता है जबकि कानून में इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।

किराएदारी कानून भारत के सभी राज्यों में अलग-अलग हैं। इन्हें कंट्रोल करने के लिए अलग-अलग राज्यों ने अपने-अपने कानून बनाए हैं पर संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम एकमात्र ऐसा कानून है जो समस्त भारत पर एक जैसा लागू होता है। इस कानून के अंतर्गत पट्टा के विषय में उपबंध दिए गए हैं। यही पट्टा किराएदारी होता है।

कोई भी व्यक्ति जो किसी दूसरे व्यक्ति से कोई जमीन या मकान किराए पर लेता है वह जमीन और मकान का मालिक कभी भी नहीं हो सकता यदि ऐसा किराएदार किसी मकान या जमीन पर दो सौ साल तक भी रहे तब भी वह उसका मालिक नहीं हो सकता है l

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