जानें कैसे स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा की एक मुलाक़ात ने बदल दिया भारत का इतिहास

लखनऊ,पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंदजी के शिकागो भाषण की 125वीं सालगिरह पर एक कार्यक्रम में जिक्र किया था कि कैसे विवेकानंदजी ने मेक इन इंडिया का आव्हान करते हुए जमशेदजी टाटा को इसके लिए प्रेरणा दी थी। आज विवेकानंद के दिए ऐतिहासिक भाषण को 126 साल से ज्यादा हो गए हैं। विवेकानंद के इस भाषण की पूरी दुनिया दीवानी हो गई थी। यही वह भाषण था जिसने भारत की दार्शनिक मेधा, गूढ़ हिंदू धर्म को संक्षिप्त रूप से लेकिन प्रभावी तरीके से पूरी दुनिया के सामने पहुंचाया था।बहरहाल, भाषण के अलावा विवेकानंद कई रूपों में भी याद किए जाते हैं। कुछ साल साल पहले विवेकानंद के शिकागो में दिए भाषण को 125 साल होने पर पीएम मोदी ने भी याद किया गया। आइए जानते हैं क्या थी वह घटना जिसका जिक्र मीडिया में चर्चा में आ गया था।

दरअसल, ये बात 1893 की है, जब विवेकानंदजी वर्ल्ड रिलीजन कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए अमेरिका जा रहे थे और उसी शिप ‘एसएस इम्प्रेस ऑफ इंडिया’पर सवार थे, जमशेदजी टाटा। शिप बेंकूवर जा रहा था। वहां से विवेकानंद को शिकागो के लिए ट्रेन लेनी थी। उस वक्त तीस साल के युवा थे विवेकानंद और 54 साल के थे जमशेदजी टाटा, उम्र में इतने फर्क के बावजूद दोनों ने काफी समय साथ गुजारा।

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इस शिप यात्रा के दौरान कई मुद्दों पर स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा में चर्चा हुई। टाटा ने बताया कि वो भारत में स्टील इंडस्ट्री लाना चाहते हैं। तब स्वामी विवेकानंद ने उन्हें सुझाव दिया कि टेक्नोल़ॉजी ट्रांसफर करेंगे तो भारत किसी पर निर्भर नहीं रहेगा, युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। तब टाटा ने ब्रिटेन के इंडस्ट्रियलिस्ट से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात की, लेकिन उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि फिर तो भारत वाले हमारी इंडस्ट्री को खा जाएंगे।

इधर, तब टाटा अमेरिका गए और वहां के लोगों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी समझौता किया। लोग बताते हैं कि इसी से टाटा स्टील की नींव पडी और जमशेदपुर मे पहली फैक्ट्री लगी। इस बात का जिक्र आज भी टाटा बिजनेस घराने से जुड़ी वेबसाइट्स पर मिल जाता है। इस पूरी मुलाकात की जानकारी स्वामीजी ने अपने भाई महेन्द्र नाथ दत्त को पत्र लिखकर दी थी।

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टाटा ने दोनों ही बातों को गंभीरता से लिया भी, उसके बाद टाटा अपने रास्ते पर और स्वामी अपने रास्ते पर। इस मुलाकात में दो बातें टाटा ने स्वामीजी से समझीं, एक गरीब भारतीय युवा को भरपेट खाना मिल जाए और दूसरी शिक्षा मिल जाए तो वो देश की तकदीर बदल सकता है, और टाटा ने रोजगार और शिक्षा को अपना मिशन बना लिया।

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