आ गया है पाकिस्तान का पानी रोकने का वक्त, आतंक पर ऐसे नहीं मानेगा पड़ोसी, जानें क्यों

एशिया में जल संधि को लेकर एक विरोधाभास देखने को मिलता है। चीन, जल-समृद्ध तिब्बती पठार पर कब्जा करके, एशिया के वाटर मैप पर हावी है। वह किसी भी पड़ोसी के साथ जल-साझा करने की संधि में शामिल होने से इनकार करता है। इसके उलट पानी की कमी से जूझ रहे भारत की अपने दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ जल-बंटवारा संधि है। इनमें से प्रत्येक संधि ने अंतर्राष्ट्रीय जल कानून में एक नया सिद्धांत स्थापित किया है।

1996 की गंगा संधि ने महत्वपूर्ण गर्मी के मौसम में बांग्लादेश को विशिष्ट सीमा पार प्रवाह की गारंटी देकर एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु संधि अभी भी दुनिया की सबसे उदार जल-बंटवारे की व्यवस्था बनी हुई है। अनिश्चित काल की इस संधि के तहत, भारत ने मूर्खतापूर्ण तरीके से पाकिस्तान के लिए छह-नदी सिंधु प्रणाली में कुल जल प्रवाह का 80.52% रिजर्व कर दिया।

वास्तव में, संधि ने सिंधु बेसिन में नदियों को प्रभावी ढंग से विभाजित किया, भारत के पूर्ण संप्रभुता अधिकार निचले हिस्से में तीन छोटी नदियों तक सीमित थे। पाकिस्तान ने ऊपरी बेसिन की बड़ी नदियों को हासिल किया। यह ‘प्रतिबंधित संप्रभुता के सिद्धांत’ को मूर्त रूप देने वाला दुनिया का एकमात्र जल समझौता है, जिसमें ऊपरी तटवर्ती राज्य एक डाउनस्ट्रीम राज्य के हितों को टालता है। मामले को बदतर बनाने के लिए, छह सिंधु-प्रणाली नदियों में से केवल चार का उद्गम भारत में है। अन्य दो का उद्गम तिब्बत में है। साथ ही इसमें चीन क्रॉस-फ्लो बदलने के लिए स्वतंत्र है।

इसके उलट सिंधु संधि भारत के गले की फांस बनी हुई है। भारत को एक ऐसी संधि के खत्म करना चाहिए जिसका कोई लाभ नहीं है, लेकिन जो सीमा पार आतंकवाद के लिए पाकिस्तान के उद्देश्य को बढ़ावा देती है। संधि से हटने के लिए उचित आधार के रूप में भारत की तरफ से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान द्वारा सरकारी आतंकवादी समूहों के मदद लेने की बात रखी जा सकती है। इंटरनेशनल कोर्ट ने भी इस सिद्धांत को बरकरार रखा है कि परिस्थितियों के मूलभूत परिवर्तन के कारण एक संधि को तोड़ा जा सकता है। पाकिस्तान भारत की जल उदारता को हमारे यहां आतंकी हमलों को अंजाम देकर साथ चुकाता है। ऐसे में भारत अपनी पानी की उदारता को खून से चुकाने की अनुमति कैसे दे सकता है? भारत 1 मार्च को स्थायी सिंधु आयोग की बैठक के लिए 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान भेजने के साथ ही संधि को आगे बढ़ा रहा है। आयोग के इतिहास में पहली बार महिला अधिकारी (सभी भारत से) भाग लेंगी।

आयोग की बैठकों को सस्पेंड किया जा सकता है। ऐसा अतीत में भी हुआ है लेकिन भारत पाकिस्तान की तरफ से अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने के बाद भी संधि से जुड़ा हुआ है। वास्तव में, पानी के पर्याप्त स्टोरेज की व्यवस्था में नहीं कर पाने भारत अपने छोटे हिस्से का पानी लगातार बोनस के रूप में पाकिस्तान में बहने की अनुमति देता है। दुनिया के अन्य देशों ने भी अपनी मर्जी से बाध्यकारी समझौतों को खत्म किया है। रूस और यूक्रेन संकट का तार अमेरिका से भी जुड़ा है। अमेरिका ने एकतरफा तरीके से रूस के साथ एंटी बैलिस्टिक मिसाइल ट्रीटी और इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज ट्रीटी को खत्म कर दिया था।

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