आखिर क्यों हो रहा है ये युद्ध? रूसी यूक्रेन को अपना क्यों देखते हैं? क्या है 1 हजार वर्ष का इतिहास?

आखिर क्यों हो रहा है ये युद्ध? रूसी यूक्रेन को अपना क्यों देखते हैं? क्या है 1 हजार वर्ष का इतिहास?

मित्रों! कोई भी युद्ध (Russia-Ukraine war in hindi) बिना कारण के नहीं होता है। क्योंकि दुनिया में हर एक देश बिना किसी कारण के अपनी सुरक्षा और अर्थ नीति को क्यों खराब करना चाहेंगे? खैर वर्तमान में चल रहें इस युद्ध के पीछे भी कई सारे कारण रहें हैं। जिसके बारे में मैं आप लोगों को लेख के इस भाग में बताऊंगा। तो, आप लोगों से अनुरोध हैं कि लेख के इस भाग को जरा गौर से पढ़िएगा। करीब-करीब एक हजार साल पहले से ही रूस और यूक्रेन का इतिहास काफी जटिल रहा है।

तथ्यों के मुताबिक जब सोवियत संघ था, तब यूक्रेन एक बहुत ही शक्तिशाली और उन्नत राष्ट्र के रूप में पूरे यूरोप में मशहूर था। यहाँ की जनसंख्या और खेती के लिए ज़्यादातर यूरोपीय देश यूक्रेन पर निर्भर थे। हालांकि! जब सोवियत संघ का विलय हुआ, तब रूस ने अपनी संप्रभुता के लिए अपने पड़ोसियों के ऊपर नजर गड़ाना शुरू कर दिया। चूंकि, अमेरिका प्रभावित नाटो देश शीत युद्ध के बाद से ही रूस की अंतरराष्ट्रिय सीमा के काफी करीब आने लगे थे। इसलिए रूस के लिए ये निश्चित करना अनिवार्य हो गया कि, उस पर भविष्य में किसी तरह की सैन्य कारवाई न हो।

इसलिए साल 1991 से ही रूस अपनी संप्रभुता के लिए दुनिया भर से लढ रहा है। यूक्रेन के बारे में और एक बात मैं आपको बता दूँ कि, वहाँ के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्र में रूसी भाषा का व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। इसलिए वहाँ काफी समय से विद्रोह का माहौल बना हुआ था। हर वक़्त यूक्रेनी सेना और विद्रोहिओं के बीच संघर्ष होता रहता था और नरसंहार जैसी बातें भी घटती होती रहतीं थी। ये ही कारण है कि, रूस ने यूक्रेन पर हमला किया!

रूस और यूक्रेन दोनों अपनी जड़े पूर्वी स्लाव राज्य (Slavic state), कीवन रस (Kievan Rus)में खोजते हैं। ये हिस्सा 9वीं शताब्दी से लेकर 13वीं शताब्दी के मध्य तक बाल्टिक से काला सागर (Black Sea) तक फैला था। इस मध्ययुगीन साम्राज्य की स्थापना, वाइकिंग्स (Vikings) के द्वारा की गई थी – स्कैंडिनेविया के लाल बालों वाले लोगों को स्लाव भाषा में रस कहा जाता था, ये लोग आज से 1 हजार साल पहले नोर्थ (डेनमार्क, नोर्वे) के हिस्सों से आये थे और उन्होंने यहां पर रह रहे स्थानीय स्लाव लोगों पर आक्रमण करके उन पर विजय प्राप्त की और कीव(Kiev) में अपनी राजधानी स्थापित की।

वर्ष 988 में ये राज्य रूढ़िवादी ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गया। यूक्रेन में भेजे गये फ्रांस के एक पादरी ने रिपोर्ट किया, “यह भूमि खुद फ्रांस की तुलना में अधिक एकीकृत, खुशहाल, मजबूत और अधिक सभ्य है।” लेकिन 13 वीं शताब्दी में मंगोल आक्रमणकारियों द्वारा कीव को तबाह कर दिया गया था, और सत्ता उत्तर में मास्को नामक एक छोटे से रूसी व्यापारिक चौकी में स्थानांतरित हो गई थी।

यूक्रेन में उपजाऊ भूमि के कारण कई शक्तिशाली राजाओं और देशों ने इस पर कई बार आक्रमण किया, यंहा की भूमि इतनी उपजाऊ थी कि इसे आज भी “यूरोप की ब्रेडबैकेट (breadbasket)” कहा जाता है। कैथोलिक पोलैंड और लिथुआनिया सैकड़ों वर्षों तक देश पर हावी रहे, लेकिन 18 वीं शताब्दी के अंत तक इंपीरियल रूस ने गैलिसिया को छोड़कर अधिकांश यूक्रेन पर कब्जा कर लिया था, गैलिसिया को उस समय ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य नियत्रिंत करता था। रूस के जार (राजा) ने इसे अपना उपनिवेश बना दिया था और 1840 के दशक में स्कूलों में यूक्रेनी भाषा के उपयोग पर प्रतिबंध लगाते हुए यूक्रेनी राष्ट्रवाद को कुचलने की कोशिश की। प्रथम विश्व के बाद यूक्रेन स्वतंत्र हुआ पर ये स्वतंत्रता बहुत अल्प थी, 1922 में सोवियत संघ के बनने से यूक्रेन भी इसका एक हिस्सा बन गया और साल 1991 में जब सोवियत युनियन टूटा तो यूक्रेन फिर से एक स्वतंत्र देश बन गया। लेकिन रूस ने देश के मामलों में दखल देना जारी रखा।